Dear Zindagi

Dear Zindagi
जैसे नीला है आसमान 
काली है ये ज़मीन 
वैसे मझको भी यकीन 
बातें है कुछ ज़रूरी 
बतलाती पर अधूरी 
मुड़कर देखे है बीते पल 
किसका है तुझको डर 

दुखी रहकर 
कोन खुश रह पाया है 
ऐसे न आगे आया है 
धोके खाकर
अंदर से फिर कमज़ोर 
बहार से बने पक्की डोर 

कभी माने कभी रूठे 
ऐसे रिश्ते टूटे 
तोड़े वादे झूठे 
दूर होकर भी 
याद तू रहे 
पास आकर फिर 
चूर तू सहे 

जैसे खली है ये जहाँ
भरी है रे नमी 
वैसे तुम्हे भी कमी 
खुदसे नाराज़ नही 
जीना ज़िंदगी  सही 
सीख रहा हूँ
हाँ.. सीख रहा हूँ  

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