Rustam

रुस्तम 

पा ली है मंज़िल
बड़ा बनकर काबिल
अब किसी ने न रोका
और लोगो से खाने धोका
मोड़ पर आकर किसी से मिल
चाइए कोई तो हो शामिल
जो इस जीत का साथी
करेगा जशन भरी जितना हाथी
जनता पर है भरोसा
जैसे माँगा वैसे परोसा
इतना बनकर मज़बूत
फिर भी मांगे सबूत
सबने सुना दिया फैसला
खत्म हो गया ये सिला
बाहर शान से निकलकर
नहीं थी गलती मान लिए
था सही जान लिया
पीकर दो जाम
करदे ये शाम
बाज़ी अपने नाम 

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